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100 शब्दों

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  • Doulatsingh Thakur

    जब मौन ही सब कुछ
    तो ज्यादा बोलना ही क्यूँ
    जब सब काम चैन से सम्भव
    तो बैचेन रहना ही क्यूँ

  • Doulatsingh Thakur

    तीस मारखा – बड़ी-बड़ी बातें करने वाला –सिरपिरा-सनकी –कल्पना लोक में जीनेवाला –अपनी बातें दूसरों से मनवाने वाला –अर्ध पागलपन —
    किसी की नहीं सुनना, अपनी ही धोकना -थोपना आदि —
    डॉन क्विक्सोट एक पुस्तक का नाम है इस पुस्तक के लेखक स्पेन के श्री मिगुएल दी सर्वेन्ट्स हैं यह पुस्तक सन-१६०५ में लिखी गई इनके नाम से ही विश्व पुस्तक दिवस २३ अप्रैल को मनाया जाता है डॉन क्विक्सोट के किरदारों को परखो।
    –डॉन क्विक्सोट जो सोंचता है वह उस कार्य को करने की असफल कोशिश करता रहता है क्योंकि उसे सही दिशा नहीं मालूम–
    एक सेंकोपाँजा व्यक्तित्व हैं, ये डॉन क्विक्सोट का चेला है उसका अंधा भक्त है।
    -सेंकोपाँजा अपने बॉस की हर हरकतों को जानते हुए भी उसकी झूठी और मनमोहिनी बातों में आ जाता है।
    डॉन की भाभी,भैया,भतीजी,उनके दोस्त सब डॉन के सिरपिरे पागलपन से परेसान हैं.
    डॉन क्विक्सोट ने बचपन से जवानी तक केवल इतिहास और राजा महाराजाओं,रानियों,सेनापति, युद्ध करना -युद्ध का सामान जैसे ढाल,तलवार,भाला,घोड़े आदि सम्बंधित किताबें पड़ी हैं –उसे बाहर की दुनिया से कुछ लेना-देना नहीं है-वह अपने कल्पना लोक में जीना पसंद करता है –वह जो सोंचता है वही उसके लिए सत्य है। क्रमश:-

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन तुम इतनी जल्दी क्यों पैदा हो जाते हो,
    बच्चों की शक्ल में,
    पहले ये क्यों नहीं बताते कि,
    तुम्हें इस घर में, तुम्हें उस घर में, पैदा होना है,
    कितनी तकलीफ होती है,
    अभाव में जीकर,
    चाहे जहाँ पैदा होने से,
    कई लोग,
    आपको भिखारियों की तरह जीने के लिए मजबूर हैं.

  • Doulatsingh Thakur

    किसी ने दौलत से सब कुछ खरीदना चाहा
    किसी ने अपने स्वाभिमान से
    हे मनुष्य तू कब संतुष्ट होगा
    अपने अभिमान से –

  • Doulatsingh Thakur

    मैं धर्मान्ध,
    क्योँ कि,मेरे संस्कारों ने,
    मुझे धर्म के विषय में,
    कुछ सिखाया ही नहीं,
    मैं मुद्रा राक्षस,
    क्योँ कि,धन के पीछे भागना,
    मेरी प्रकृति एवं संस्कृति,
    बन चुकी है –

  • Doulatsingh Thakur

    जो समस्यांओं से घीरा रहता है,
    मानो उसका जीवन माला में पीरो रहता है,
    जो परिवार में दुखी है,
    उसका जीवन सुखी है,
    जो बाहर है,
    उसकी ही बहार है,
    जो समय के साथ फास्ट है
    वह फस्ट है,
    जो हर पल खुश है,
    वह जीवन में मस्त है,
    जो दुःख मनाता है,
    वह सुख भोगता है,
    जो सुख भोगता है,
    वह सदेव दुःख और गम में रहता है

  • Doulatsingh Thakur

    थी बहुत दौलत —बरस बीत गए—ख़त्म ही नही होती —शैतान ने कहा —“”तू मुझे जानता रहे ,मुझे भूलाना मत–

  • Doulatsingh Thakur

    मैं धन के गुरुर में चूर’
    हो गया अपनों से दूर,
    क्योँ धन —
    तुममें क्या-क्या पाप छिपे हैं
    हाँ तुम्हारे कारण होने वाले पापों को, तुम नहीं मिटा सकते,
    वरना पाप इस धरती से उठ जाएगा ,
    धन सुना है हमने तुम बेघर हो,
    कठपुतली हो कई हांथों की,
    इसलिए मैं तुम्हारा विश्वाश कैसे करूँ,
    कि तुम मेरी रक्षा करोगे –

  • Doulatsingh Thakur

    मैंने आत्मा से पूछा–मैं गरीब और दीन लोगों से ईर्षा और घृणा क्यूँ करता हूँ ? उन्हें मैं घी लगी रोटी और मेवा मिष्ठान भी खिलाता हूँ , कपडे भी देता हूँ —आत्मा ने मुझसे कहा बस तू कभी भी इस राज का जिक्र न करना —“तू इन लोगों से ईर्षा और घृणा करता रहे”–“बस यही तेरी जीत है”

  • Doulatsingh Thakur

    स्वार्थता,झूठे विश्वास की जननी बन गई,
    काम और मान आदमी की मर्जी बन गई,
    और, सहनशीलता आदमी की दासी बन गई

  • Doulatsingh Thakur

    ह्रदय काँपता जरूर है,
    कभी गुनाह करने के पहले,
    कभी गुनाह करने के बाद

  • Doulatsingh Thakur

    “तैयारी”

    पत्रकार बंधू झूठी – सच्ची खबर की ‘
    “तैयारी” में व्यस्त थे —

    डॉक्टर मरीज से रुपये जमा होने के बाद,
    आँपरेशन की तैयारी में दिखे–

    इंजीनियर अपने पेंडिंग बिल पास कराने की
    “तैयारी” में घूम रहे थे–

    जज साहब “भगवान बनकर”झूठे सबूतो के चलते
    फैसले की “तैयारी”की सोच में डुबे हुए नजर आये–

    उधर व्यापारी ने घूस देकर गोदामों में माल भरने की
    “तैयारी” कर ली थी —

    और वंहा घूस लेने की तैयारी ही चल रही थी कि,
    तभी “सरकारी लोगों ने सरकारी आदमी को पकड़ने की
    “तैयारी कर डाली —

    और यंहा इंस्पेक्टर राज का बोल बाला चल रहा था
    वे व्यापारी और भ्रस्टाचार से धन कमाने वालों को
    फांसने की “तैयारी कर रहे थे —

    और ये महाशय मकान और पढ़ाई के नाम से लोन लेने
    की “तैयारी”में बैंकों के चक्कर लगाते हुए दिखे—

    और इधर देखिये कुछ युवा देश को ख़ाक में मिलाने की
    “तैयारी” में गुंडा गर्दी और मद मस्ती में चूर नजर आये–

    और ये बेटे और बहु ने माता पिता की सम्पती हड़पने की
    “तैयारी” कर ली —

    ये बाप लड़की की शादी के लिए रूपया जुटाने की “तैयारी”
    में पागलों की तरह घूम रहे हैं —

    और अंत में एक मजदूर और कम वेतन पाने वाले को ही
    “”” ये मंहगाई नजर आती है जनाब —

  • Doulatsingh Thakur

    काम अभी बाकी हैं,मानव कर रहा है,अपने पैरों की खुदाई,यंहा का सामान वहां रख रहा है (प्रकृति से लेकर )–बस इससे ज्यादा और क्या हो रहा है,खुशी मिलती है ऐसा करने में,और अपने आप को सफल मानने और मनवाने में. क्या मकान,कपड़ा, गाड़ियां और ऐशो आराम की सामग्री ही उसकी सफलता है ? हाँ,हम जीवन से अनभिग हैं, और इसी अनभिज्ञता में,जीवन के कई कार्य,बाकी रह जाते हैं

  • Doulatsingh Thakur

    डे केयर ऑफिस एक परिकल्पना है —

    पत्नी को रात्रि में ही बहुत ही गर्व से झूठ बोल दिया था कि, कल ऑफिस में बहुत काम है, बाहर से साहब लोग आ रहे हैं ! सुबह जल्दी निकल जाऊंगा,तत्समय बच्चों के सामने भी बहुत काम करने वाले पापा का दर्जा भी प्राप्त कर लिया।
    पत्नी को बिल्कुल भी आभाष नहीं होने दिया कि, कल ऑफिस में कोई काम नहीं एन्जॉयमेंट दिवस है.
    डे केयर ऑफिस में आकर कितनी आजादी मिलती है जहाँ घर से ज्यादा सुकून और आराम मिलता है, ऐसा लगता है कि हम सुरक्षित जगह पर आ गए -अब दिन भर झूठ के सहारे चलते रहना है –कोई काम समय पर नहीं करना है –काम को पेंडिंग रखते जाना है —
    बहुत सारी फ़ालतू की बातों में दिन बिताना है, डे केयर ऑफिस में काम को छोड़कर अनगिनत विषय हैं जिनपर रोज ही चर्चा और बहस होती है.
    एक बात मानो तो सरकार ने ये डे केयर ऑफिस ही इसलिए खोले हैं कि,कर्मचारी -अधिकारी “”आलसी और ज्ञानी” हो जाये
    अपने घर और समाज के कई काम डे केयर ऑफिस से ही संपन्न किये जाते हैं-
    बच्चों के पैदा होने से उनकी पढाई,सर्विस, और फिर शादी तक सारे कामों को अंजाम डे केयर ऑफिस से ही दिया जाता है.
    प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री-एवं मंत्रियों को इस प्रकार तू तुकारे से सम्बोधित किया जाता है जैसे वे इनके नौकर हो गुलाम हो तुक्ष्य प्राणी हो.day केयर ऑफिस में कुछ चीजें तो निःशुल्क हैं जैसे –पेपर्स,पेन,चाय-नाश्ता, व्हीकल आदि आप जो सोचों — हाँ मैं मानता हूँ कि, कई डे केयर ऑफिस में काम की अधिकता रहती है,लेकिन अधिकांश में ९ घंटे या 7.5 घंटे खुलने वाले डे केयर ऑफिस करीब ७ या ६ घंटे का समय कर्मचारियों को फ्री मिलता है जिसमे वे कवि -लेखक -चिंतक -विचारक आदि बनने का कार्य बखूबी निपटाया करते हैं —
    सही कहा है –“देश में आलसियों की और फ़ालतू की बातें करने वालों की,बगैर मांगे सलाह देने वालों की बढ़ती हुई तादात ही देश को वर्बाद कर रही है””
    क्या सरकार केवल सरकारी -अर्धसरकारी कर्मचारियों की ही हितेषी है –
    प्रायवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों से कोई मतलब नहीं–
    हाँ प्रायवेट कंपनी के मालिकों से सरकार का बहुत गहरा रिश्ता होता है,
    “टैक्स” का बचा भी लो और सरकारी अधिकारीयों को रिश्वत देकर खरीद भी लो-“”-कुल मिलकर देखा जाये तो ये बड़े व्यापारी ही सरकार हैं देश की महंगाई तय करना भी इन्ही के हांथों में है ऐसा क्यों? खेर हम डे केयर ऑफिस की पुनः चर्चा बाद में करेगें–जन hit में –

  • Doulatsingh Thakur

    तन मन धन तीनों खो गए,
    क्यों भाई —
    रिश्वत की शराब और धन से ???

  • Doulatsingh Thakur

    धन से अपराध को,
    खरीदने की बहुत कोशिश की,
    लेकिन,
    न्याय की वेदी को ये मंजूर न था —

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन —मैंने कई लोगों को कई प्रकार सेधोखा दिया है जैसे धन,वादे,प्यार,वफ़ा, इत्यादि क्या मुझे इसकी सजा मिलेगी ?
    जीवन ने कहा –सजा देना ईश्वर के हाथ में और किये गए अपराधों का
    प्रायश्चित करना आपके हाथ में –

  • Doulatsingh Thakur

    खलील ज़िब्रान का कल्पना लोक —
    इस गार्डन को देखो–इसमें कई प्रकार के फूल हैं –छोटे-मंझले-और बड़े —
    आप कल्पना करो कि यह एक शहर है –ये जो बड़े फूल हैं इस शहर के आमिर लोग है उनके बंगले है –उनसे छोटे मध्यम फूल और उनसे छोटे गरीब फूल ( लोग) हैं –ये उनकी कालोनिया हैं –एक दिन गरीब कालोनी का एक फूल रूठ गया और प्रकृति से निवेदन करने लगा की मुझे भी बड़ा आदमी बनना है, धनवान बनना है –प्रकृति ने उस छोटे फूल को बहुत समझाया की बड़ा आदमी बनने में कोई फायदा नहीं वे अपने जीवन में दुःखी रहते हैं, कई प्रकार की समस्ययों से घीरे रहते हैं –लेकिन वह गरीब फूल नहीं माना और जींद करने लगा की आप तो मुझे कैसे भी हो बड़ा आदमी (फूल) बना दो — प्रकृति ने कहा कि कोई अनहोनी होगी तो मैं तुम्हे बचा नहीं पाऊँगी –फिर प्रकृति ने उसका निवेदन स्वीकार कर उसे बड़े फूल के बराबर बड़ा कर दिया –बड़ा फूल (आदमी) बनकर वह बहुत खुश हुआ, उसके बाद वह अपने से नीचे के फूलों को बड़े ही घमंड से देखने लगा और उन्हें तूक्ष प्राणी मानने लगा –दूसरे जो वास्तविक बड़े फूल( बड़े आदमी ) थे वे उसके बड़े होने पर मुस्कुरा रहे थे -वास्विकता में वे बड़े आदमी यह कहना चाह रहे थे क़ि, बेटा तू कैसे भी बड़ा तो हो गया लेकिन ज्यादा दिन चल नहीं पायेगा — एक दिन प्रकृति ने रात्रि में धरती पर सुबह तक बहुत पानी वरसाया– इस वर्षा के पानी से जितने भी बड़े फूल थे सब धरती पर आ गीरे–जब बड़े फूल धरती पर गीर रहे थे तब गरीब फूल और माध्यम फूल उनकी मजाक उड़ाने लगे और कहने लगे आप तो बहुत बड़े फूल थे आप कैसे गीर गए आप तो धनवान थे फिर ? —जब वर्षा थमी तब पानी आस-पास से निकल गया –इसमें हुआ ये क़ि, बड़े फूल तो एक बार गीरने के बाद दुबारा उठ नहीं सके (मतलब उनके महलनुमा मकान भी धराशाही हो गए ) — जब प्रकृति ने अपना कहर बंद किया और सूर्य उगा तब छोटे फूलवाले गरीब लोग फिर से उठ कर खड़े हो गए –कहने का मतलब ये है कि, प्रकृति एक दिन सब और सबको बराबर कर देती है –लोगो के दुःख में काम आते रहो बस यही सत्य है —

  • Doulatsingh Thakur

    खलील ज़िब्रान का कल्पना लोक —

  • Doulatsingh Thakur

    क्योँ धन —
    तुममें क्या-क्या पाप छिपे हैं
    हाँ तुम्हारे कारण होने वाले पापों को, तुम नहीं मिटा सकते,
    वरना पाप इस धरती से उठ जाएगा ,
    धन सुना है हमने तुम बेघर हो,
    कठपुतली हो कई हांथों की,
    इसलिए मैं तुम्हारा विश्वाश कैसे करूँ,
    कि तुम मेरी रक्षा करोगे —

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन– मैं जी रहा था,
    यूँ ही,
    अब मैंने”आपको ”
    फिर से जीने का वादा किया है,
    मैं नित्य गलत विचारों में खोया,
    दिशा हीन होकर,
    अब मेरी दिशा और दशा,
    दोनों बदलने लगे हैं,
    केवल ,
    अच्छे और दिव्य विचारों के सांथ

  • Doulatsingh Thakur

    जब मैं मदद करने के लिए सक्षम था –तब मैंने किसी की मदद नहीं की “” अब मैं अक्षम हो गया तो मदद की गुहार कर रहा हूँ”

  • Doulatsingh Thakur

    धन और ख्याति,
    सर्वजन को नहीं अपनाती,
    लेकिन,
    बुद्धिजीवी को ख्याति, भली मिल पाती,
    और,
    निरंकुश को धन थाह मिल जाती–

  • Doulatsingh Thakur

    धन तो था–लेकिन– किसी को देने व सेवा करने का ध्येय नहीं था –गम होता था– उसके कम होने का–इसलिए —जीवन मे किसी को दिया नहीं “”” अब छोड़ कर जा रहा हूँ”

  • Doulatsingh Thakur

    पाप कर्म को याद कर उसका भुगतान और प्रायश्चित करना
    मनुष्य के लिए दुःख का नाम है

  • Doulatsingh Thakur

    भरे पेट निः स्वार्थ भाव से सेवा करने की कसमें खाते हैं,
    यदि सबका पेट भरा हो तो ?

  • Doulatsingh Thakur

    मुझे मंची सम्मान नहीं मिला,
    सोचा सम्मान अन्त है किसी काम का,
    और मैं,
    काम का अन्त करना नहीं चाहता

  • Doulatsingh Thakur

    मानव सोंचता तो है कि,
    उसका ये जीवन समाप्त हो रहा है,
    क्यों हो रहा है –ये नहीं सोंचता —

  • Doulatsingh Thakur

    ये जो बच्चे हैं हमारे नहीं,
    भगवान के माध्यम से धरती पर पैदा हुए हैं,
    उनकी सोच उनका जीवन स्वमं का,
    माता पिता अच्छी परवरिश और राह बताते हैं,
    लेकिन ?
    जीवन –मैं पत्नी और बच्चों को ही अपना जीवन समझ बैठा था,
    ज्ञात हुआ सब आपकी ही माया और मोह है ,
    उन्हें क्या करना ,क्या बनना और कैसे जीना वे ही जाने,
    आपके अंदर —

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन –तुम मुझे समाप्त कर सकते हो,
    यदि मैं सही राह पर नहीं चला तो,
    शरीर तो भोजन है पंचतत्व का,
    मानव बुरी आदतों से शरीर को रोगी बना देता है,
    फिर वह खुद को दोष देने लगता है –वह कहता है —
    “मेरा तो जीवन ही ख़राब हो गया –वह यह नहीं कहता कि,
    “मेरा तो शरीर ही ख़राब हो गया

  • Doulatsingh Thakur

    धनपतियों के सामने,
    गरीब और अज्ञानी आदमी को, बड़ी-बड़ी बांते और घमंड करने का अधिकार नहीं,
    गूंगे -बहरे बनकर अपमान सहना जरुरी सा लगता है,
    ज्यादा बोलने पर वह जलील होगा,
    और उसकी मौत का फरमान जारी किया जायेगा–

  • Doulatsingh Thakur

    जिधर देखता हूँ,
    परछाइयाँ ही नजर आती हैं,
    मैं इन्हे पहचान नहीं पाता,
    और अक्सर विश्वासघात और,
    धोके का शिकार हो जाता हूँ,
    असमंजस की स्थिती में,
    विश्वास को ढूंढने की कोशिश की,
    कहीं दिखाई नहीं दिया,
    न मनुष्य में न जानवर में,
    हाँ,
    विश्वास दिलाने वाले बहुत मिले,
    और फिर मैं दिवास्वप्न में खो जाता हूँ,
    और अंत में परछाईं को स्वीकार कर,
    इस जीवन की परछाइयों से धोखा खाते रहता हूँ

  • Doulatsingh Thakur

    गर्व से कह दिया,
    फलां-फलां नेता -अधिकारी से,
    अच्छी जान पहचान है,
    बस यही सोच,
    उन्हें झूठे आत्मविश्वास से भरे रहती है,
    ऐसा आत्मविश्वास कभी-कभी कानून का उलंघन,
    अवश्य ही करता है —

  • Doulatsingh Thakur

    जिसने अपमान सहना सिख लिया,
    उसने जीवन जीना सिख लिया,
    धैर्य हो थोड़ा भी जिसके पास,
    उसने यह जीवन का युद्ध जीत लिया,

  • Doulatsingh Thakur

    देखना यारों,
    कहीं,
    मान-सम्मान की धारा में बह मत जाना ?

  • Doulatsingh Thakur

    बड़े अधिकारी एंड व्यापारी पहले शासन के समर्थक बन जाते हैं ,
    और फिर कुशासन फैलाते हैं.

  • Doulatsingh Thakur

    मृत्यु तुम अमर हो क्योँकि तुम्हारा अमरत्व आज तक कोई देख नहीं पाया।
    जीवन तुम ज़हर हो क्योँकि तुम्हें जीते हुए सब देखतें हैं

  • Doulatsingh Thakur

    जो परिवार में दुखी है,
    उसका जीवन सुखी है,
    जो बाहर है,
    उसकी ही बहार है,
    जो समय के साथ फास्ट है
    वह फस्ट है,
    जो हर पल खुश है,
    वह जीवन में मस्त है,
    जो दुःख मनाता है,
    वह सुख भोगता है,
    जो सुख भोगता है,
    वह सदेव दुःख और गम में रहता है

  • Doulatsingh Thakur

    मैंने उसे धोखा दिया और झूठे वादे किये ,
    और उसने उसे सत्य मान लिया।

    किसी ने दौलत से सब कुछ खरीदना चाहा ,
    किसी ने अपने स्वाभिमान से.
    हे मनुष्य तू कब संतुष्ट होगा अपने अभिमान से।

    किसी ने धैर्य को बेच दिया,
    किसी ने उसे खरीद लिया।

    किसी ने भगवान को आपस में बाँट लिया
    किसी ने उन्हें कैद किया।

    किसी ने राहत की सांस ली,
    किसी ने रहम की भीक मांगी।

    किसी ने मन बेचा,
    किसी ने तन बेच दिया, सब गफलत की दुनिया है

  • Doulatsingh Thakur

    ईश्वर आपने मानव जीवन दिया,
    रूपया (धन) आपने नहीं बनाया, ऐसा क्यों किया ??
    मंहगाई से आम जनता परेशान हो रही है,
    मानव इतिहस बन गया,
    रुपये-संपत्ति -खण्डहर हैं और खंडहर रहेंगें–

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन -आप कब तक मेरी ” मदद” करते रहेंगें,
    कहा -जब तक तुम मेरा “अदब” करते रहोगे —

  • Doulatsingh Thakur

    मानव अधूरा सा लगता है,
    सोंचता क्या है और करता क्या है,
    जीवन की आपा-धापी में बेचारा सा लगता है
    (अपने स्वार्र्थ के लिए खींच-तान )

  • Doulatsingh Thakur

    जब भी खुश हुआ,
    तब दु:ख का आभाष हुआ,
    क्षण भर का सुख,
    और दु:ख दशियोें,
    इसलिए सोचा इस “तन” जीवन में,
    दुःख को अपनाना ही श्रेष्कर —

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन मैं जंहा जंहा से भी गुजरा हूँ –वंहा मेरे पीछे खाई थी –मेरी पीछे मुड़ कर देखने की कभी हिम्मत नहीं हुई.

  • Doulatsingh Thakur

    जो परिवार में दुखी है,
    उसका जीवन सुखी है,
    जो बाहर है,
    उसकी ही बहार है,
    जो समय के साथ फास्ट है
    वह फस्ट है,
    जो हर पल खुश है,
    वह जीवन में मस्त है,
    जो दुःख मनाता है,
    वह सुख भोगता है,
    जो सुख भोगता है,
    वह सदेव दुःख और गम में रहता है

  • Doulatsingh Thakur

    मैं फिर उसी दो राहे पर आकर खड़ा हो गया,
    जैसे समुद्र में जहाज का किनारा खो गया –

  • Doulatsingh Thakur

    जिंदगी में आपके सिवाये,
    कौन-कौन आया ,
    ये बताने में असमर्थ हो गया हूँ।
    सत्य तो ये है,
    कोई नहीं आया –

  • Doulatsingh Thakur

    बीस बरस हुए शादी को,
    खूब झूठ बोला खूब वादाखिलाफी की,
    लेकिन,
    अभी कुछ ही दिनों से,
    मैं उसे “अपनी ” पत्नि और प्रेयशी मानने लगा हूँ —

  • Doulatsingh Thakur

    कहते हैं लोग प्यार बकबास और फरेबी होता है –ऐसा क्यूँ कहते हैं लोग –क्योंकि–लोग झूठ बोलते और झूठे वादे करतें हैं–और झूठ एक दिन सामने आ ही जाता है

  • Doulatsingh Thakur

    मैंने तो जिंदगी के कई पल यूँ ही बिता दिए,
    अब इस उम्र पर आकर जाना कि,
    मैं तो इन सीढ़ियों के निचे ही खड़ा रह गया,
    एक चढ़ाव तो चढ़ पाता,
    तो पश्चाताप के ये अश्रु न आते

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन —मैं प्रतिदिन “सुबह” बुरी आदतें छोड़ने की झूठी कसमें खाता हूँ —अपशब्द बोलने की,शराब छोड़ने की,परिवार में विवाद नहीं करने की,झूठ बोलने और धोखा नहीं देने की —
    “और फिर रात होते होते ये सारी कसमे तौड़ देता हूँ ?
    जीवन ने कहा —तुम अपनी व्याकुल इच्छाओं के वश में हो गए हो –तुममें इच्छाशक्ति,दृढ़संकल्प की कमी आ गई है –अब इससे निजात पाने का एक तरीका हो सकता है –कि तुम कुछ पल,कुछ दिन — अपना अच्छा -बुरा सोचने के लिए “”अपने आप को अकेला कर लो

  • Doulatsingh Thakur

    दूर तलक देखा,
    बहुत ढूंढा,
    विश्वास को,
    लेकिन,
    विश्वास को मारने वाले,
    मिलते गये—-

  • Doulatsingh Thakur

    बहुत अहसान और मदद की थी उन्होंने —
    सम्मुख में देखा–
    उनका अनादर और अहसान-फरामोश होते हुए –

  • Doulatsingh Thakur

    औरत उस गुलाब के पौधे में उगा एक खूबसूरत
    ” फूल ” है जिसकी खुशबू लेकर, उसे सहज कर रखा जाना अति
    आवश्क है –

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन — मेरी वाइफ कहती है कि,
    मैं मुर्ख और बुद्धू हूँ —
    मैं कहता हूँ कि, तुम सत्य ही कह रही हो
    इससे वह प्रसन्न रहती है

  • Doulatsingh Thakur

    *तैयारी*
    मंत्री और अधिकारी देश के विकास की
    “तैयारी” कागज पर उतार रहे —
    जिसे अंजाम देने की “तैयारी”
    दूर तक दिखाई नहीं देती

  • Doulatsingh Thakur

    हे मानव तुम खुश रहो,
    अपनों के स्वागत और प्यार से,
    चाहे सुशोभित हो जाओ,
    अपने ही तिलक से,(अपने धन से)
    चाहे गैरों को निहार लो छल मन से,
    लेकिन इस दीवाली गैरों से मिल अपना बनालो–
    इस कार्य के लिए ” फेसबुक को धन्यवाद ” आपका साथी –
    दौलतसिंह ठाकुर

  • Doulatsingh Thakur

    सच्चे धोखेबाज,
    कुछ झूठे धोखेबाज,
    सच्चे धोखेबाज इन्तजार करते हैं,
    धोखा “सच” होने का,
    लेकिन,
    झूठे धोखेबाज,
    सच्चे धोखों को,
    “सच” में बदलने नही देते—

  • Doulatsingh Thakur

    मैंने कोशिश की थी,कि,
    उनकी कशिश कम कर संकू–
    लेकिन,
    उनकी तकदीर मैं, nahi
    बदल सका–

  • Doulatsingh Thakur

    सम्बन्ध और सम्बद्ध मे बहुत फर्क है —संबन्ध यानी किसी को अपना बनाना –सम्बद्ध यानी किसी के बनकर रहना —एक सामाजिक आदमी के लिए ये दोनों जरुरी हैं

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन —९९ के फेर में कई मनुष्य उलझ गए हैं —उन्हें केवल एक ही चिंता सताती है कि, ये १०० कब हो जायेगें—जब १०० हो जाते हैं तब फिर चिंता –ये हजार-लाख -करोड़ -अरब -कब तक होंगे “”बस”

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन –बच्चों को उनकी माताएं इतना क्यों डांटती हैं -कभी-कभी ऐसा लगता है ये रूठ कर कहीं चले जायेंगे ?
    जीवन ने कहा— वे कहीं नहीं जायेंगे ” माँ की बार-बार डांट, मार, समझाईश और फिर दुलार –“भगवान् भी नहीं समझ सके “-

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन –गरीब,मध्यमवर्गीय,और अमीर लोगों में क्या अंतर है ?
    जीवन ने कहा — सब नियति का खेल है —
    — गरीब अपनी रोजी -रोटी में ही लगा रहता है उसे इज्जत,और
    सम्मान से कोई लेना देना नहीं।
    — मध्यमवर्ग -झूठी इज्जत,सम्मान और रूढ़ियों को निभाने के
    लिये ही जीया करते हैं।
    — और अमीर लोग इन दोनों को दबाकर केवल अपनी ख्याति के
    लिये कुशासन के समर्थक बन जाते हैं –

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन –दोस्त और भाई में क्या अंतर है ?
    जीवन ने कहा –आजकल- दोस्त को सहयोगी और भाई को दुश्मन
    समझा जा रहा है

  • Doulatsingh Thakur

    गरीब थे लेकिन दूसरों को आदर और सम्मान,
    देने के धनी बनते रहे,
    पैसे -कोड़ी से मोहताज भी रहकर,
    झूठी -शान-ओ-शौकत का नवजीवन बिताते रहे,
    स्वार्थ की भावना दिल में रखकर,
    सब को खिलाते रहे,
    स्वार्थ पूर्ण न हो सका तो,
    सम्मान गिराकर दिल दुखाते रहे,
    और फिर इज्जत से बे आबरू करने के शब्द,
    जीवान पर लाते रहे,
    हे ईश्वर तुम गरीब किसी को न बनाना,
    वरना लोग गरीबी के साथ देश को बर्वाद कर देंगे –

  • Doulatsingh Thakur

    हे ईश्वर,
    तुम तो हो नश्वर,
    फिर मानव को क्यों बनाया,
    दुराचारी
    कुछ तो
    शक्ति देते मानव को,
    ये पाखण्ड का खेल,
    ये पाप कर्म,
    को
    समझने की बुद्धि ही दे देते–

  • Doulatsingh Thakur

    हम बड़े पीर के हैं पैगम्बर,
    हम में सब हैं ,हम सबके अदंर,
    मान-नाम-काम-जाम-दाम,
    सब भरे हैं,हमारे अदंर,
    क्योंकि, भाई हम हैं समंदर

  • Doulatsingh Thakur

    pati or patni

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन — देश के रक्षक,सेवक और भक्षक तथा राक्षस कौन हैं ?
    जीवन ने कहा –देश की सीमा पर तैनात सैनिक देश के रक्षक
    और सेवक हैं।
    और देश के अंदर समाज सेवा, गरीबों की सेवा के
    नाम पर लूटने वाले, जनता से झूठे वादे कर गुमराह
    करने वाले,प्रेम से या डरा कर चन्दा मांगने वाले,
    धन के लोभी भ्रस्टाचार करने वाले व्यापरी ,कई पार्टियों के
    नेता, काम कम और वेतन ज्यादा मांगने वाले
    कर्मचारी और अधिकारी देश के भक्षक और राक्षस
    हैं –

  • Doulatsingh Thakur

    इन गुम-राह रास्तों पर,
    मैं गुमराह होकर चलता ही गया,
    और चलते-चलते–
    इस जीवन की राह से विदा हो गया –

  • Doulatsingh Thakur

    देश को चलाने के लिए सरकार की डरावनी नीतियां होनी चाहिए
    तब ही देश की जनता जाग्रत होगी

  • Doulatsingh Thakur

    गफलत ही गफलत है —
    मैंने उसे धोखा दिया और झूठे वादे किये ,
    और उसने उसे सत्य मान लिया।
    किसी ने दौलत से सब कुछ खरीदना चाहा ,
    किसी ने अपने स्वाभिमान से.
    हे मनुष्य तू कब संतुष्ट होगा अपने अभिमान से।
    किसी ने धैर्य को बेच दिया,
    किसी ने उसे खरीद लिया।
    किसी ने भगवान को आपस में बाँट लिया
    किसी ने उन्हें कैद किया।
    किसी ने राहत की सांस ली,
    किसी ने रहम की भीक मांगी।
    किसी ने मन बेचा,
    किसी ने तन बेच दिया, सब गफलत की दुनिया है

    • http://www.myviews.co.in DR. NEERAJ MEEL

      क्या खूब कहा है …..अपनी लेखन से बहुत अच्छा लिखते हो …क्या http://www.myviews.co.in पर नियमित लेखन करना चाहोगे ? अगर हां तो तुरंत http://www.myviews.co.in पर क्लिक करो और सबमिट करो अपनी लेखन सामग्री

  • Doulatsingh Thakur

    गफलत ही गफलत है —

    किसी का सम्मान खो गया’
    किसी का आदर्शवाद खो गया।

    किसी ने कहा ये जमीन मेरी है’
    किसी ने कहा सरकार की,
    किसी ने कहा दो गज जमीं,
    और तुम जमीन के नीचे, या
    लकड़ियों में ख़ाक कर दिए जाओगे।

    किसी के मन का काम हुआ ,
    किसी का दिल टूट गया।

    किसी ने कहा यंहा मेरा राज है ,
    किसी ने कहा तुम गुंडे हो,
    किसी ने कहा यहां तुम्हारे बाप का राज चलता है,
    किसी ने कहा नहीं —
    हमारी पार्टी व हमारी सरकार का।

    किसी ने कहा मैं महल चौबारे खड़े करूंगा ,
    किसी ने कहा –एक झोपड़ी की चाहत है —

  • Doulatsingh Thakur

    मनुष्य के मन में सम्मान,इज्जत और अपनी बढ़ाई कराने की
    भावना क्यों रहती है ?
    कहा– ये सब निरर्थक और क्षणिक हैं,
    यदि किसी का सम्मान बढ़ाई और इज्जंत हो
    रही है तो ये मान कर चलो किसी अन्य मनुष्य
    का अवश्य ही अपमान हो रहा होगा

  • Doulatsingh Thakur

    पेड़ को देखो, वही माता है और वही पिता है
    बीज भी देता है और फल भी;
    हमारे माता -पिता भी पेड़ के समान ही है,
    जो पूज्नीय होते हैं , उनका अनादर और अपमान करना
    सभी पापों से बड़ा माना जाना चाहिए –

  • Doulatsingh Thakur

    विश्वास और आशा से ही प्यार ज़िंदा रहता है।

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन तुम नहीं तो मेरा क्या ?

  • Doulatsingh Thakur

    भ्रस्टाचार से देश में पूंजीवाद को बढ़ावा मिलता है,
    लोगों की पूंजी बढ़ कर तिजोरी में चली जाती है ,
    और मुद्रा बाजार से गायब होने लगती है ,
    रिजर्व बैंक द्वारा हर वित्तीय वर्ष में,
    ५००/१०००/ के नोटों को बदलने की और विचार करना चाहिए

  • Doulatsingh Thakur

    यदि आप अपने बच्चों से सम्मान पाना चाहते हैं ,
    तो बच्चों की “माँ” को ढेर सारा प्यार,इज्जत और
    सम्मान दीजिये –सबका मंगल हो –

  • Doulatsingh Thakur

    सभी शादी- सुदा महिलाओं से निवेदन —
    अपने पतियों की गतिविधियों पर
    ध्यान “”मत”” दीजिये –मंगल हो –

  • Doulatsingh Thakur

    इन गुम-राह रास्तों पर,
    मैं गुमराह होकर चलता ही गया,
    और चलते-चलते–
    इस जीवन की राह से विदा हो गया —

  • Doulatsingh Thakur

    मैने सहनशीलता को अपना लिया,
    और जिंदादिली को छोड़ दिया,
    जब यहां मुरदारों की संख्या,
    कई गुना,
    तब इनके सामने जिंदादिली दिखाने से ,
    क्या फायदा,
    इसीलिये अब,
    मैंने अपमान को भी धैर्य से सहन करना सीख लिया,
    और इस जीवन के युद्ध को जीत लिया

  • Doulatsingh Thakur

    मुझे न देश की कोइ चिंता,
    न सेवा करने की कोइ सोच ,
    मुझे न समाज से कोइ सरोकार ,
    न परिवार से कोइ प्यार,
    मैं स्वार्थी व्यक्ति,
    केवल अपने से करता हूँ प्यार।
    बताइये मैं कोन हूँ ?

  • Doulatsingh Thakur

    मैने एक चीज देखी –हर आदमी डॉन क्विक्जोट याने की तीस मारखा है —
    मंगल

  • Doulatsingh Thakur

    मैंने गरीबी और भ्रस्टाचार मिटाने की झूठी कसमें खाई है,
    क्या तुम मुझे पहचान सकते हो ?-

  • Doulatsingh Thakur

    क्या कभी ऐसे काम किये हैं,
    जिससे सीना फूल जाता हो फ़ख़र से,
    राह के पत्थर के सिवा और क्या है तेरा जिक्र

  • Doulatsingh Thakur

    रखते तो हम भी हैं तलवार लेकिन वह
    म्यान में ज्यादा रहती है
    खेल तो कई हम भी खेलना जानते हैं
    लेकिन अक्सर
    हम दूसरों को खेलना सिखा दिया करते हैं —

  • Doulatsingh Thakur

    लोग पहेले परिवार में आपस में झगड़ते रहते हैं
    जब उनमे से किसी की मौत हो जाती है
    तब सब दुःख और गम मनाने लगते हैं
    कुछ समय के लिए सब शांत हो जाते हैं
    लेकिन उनकी ये शान्ति क्षणिक होती है
    “मौत जीवन का रहश्य है जिसे कई लोगों ने समस्य़ा का हल मान लिया “

  • Doulatsingh Thakur

    किसी ने कहा मैं अपमान सहन नहीं करता
    किसी ने कहा मैं दूसरों को सम्मान देता हूँ
    और अपमान सहता हूँ-

  • Doulatsingh Thakur

    जब दिल ने गर्दिश में तुम्हें पुकारा था
    तब तो तुम आये नहीं
    अब मैं मौत के घर जा रहा हूँ
    तब तुम मेरी बिदाई के लिए आ गए

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन — देश के रक्षक,सेवक और भक्षक तथा राक्षस कौन हैं ?
    जीवन ने कहा –देश की सीमा पर तैनात सैनिक देश के रक्षक
    और सेवक हैं।
    और देश के अंदर समाज सेवा, गरीबों की सेवा के
    नाम पर लूटने वाले, जनता से झूठे वादे कर गुमराह
    करने वाले,प्रेम से या डरा कर चन्दा मांगने वाले,
    धन के लोभी भ्रस्टाचार करने वाले व्यापरी ,कई पार्टियों के
    नेता, काम कम और वेतन ज्यादा मांगने वाले
    कर्मचारी और अधिकारी देश के भक्षक और राक्षस
    हैं –

  • Doulatsingh Thakur

    कहते हैं लोग कि मानव मानव का दुश्मन है
    क्योंकि मनुष्य का दिमाग ही उसका दुश्मन है

  • Doulatsingh Thakur

    ये देश नेता विहिन हो जाय तो क्या होगा ?
    अंधेरगर्दी का राज हो जायेगा -कई चोपट राजा बन जायेंगे
    देश को लोग टुकड़ो में बाँट लेंगे
    भोली जनता गुलामियत में जीयेगी
    खाने के लिए भिक्षा मांगना पड़ेगी
    बच्चे पैदा होने पर पाबन्दी लग जायेगी
    अपराध चरम पर पहुँच जायेगा
    सूरज नही निकलेगा और रात भी नहीं होगी
    जिसके हाँथ में लाठी उसकी भेंस हो जायेगी –

  • Doulatsingh Thakur

    मैं दुखी तो था
    लेकिन इस दुःख को
    “जाहीर”
    न कर सकने का दुःख
    जाहीर के पीछे सत्य है देखिये —
    एक दिन हम जाहीर जरुर होंगे

  • Doulatsingh Thakur

    जीवन –क्या राज-नीति एक दूसरे पर छींटाकशी और नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए होती है ?
    जीवन ने कहा –“नहीं”कई लोग राज-नीति का अर्थ नहीं समझते, जिनके हाँथ में सत्ता होती है, वे चाहे जैसे देश को चलाने की कोशिश करते हैं — उनसे असंतुष्ट लोग उनके बनाये नियमों की धज्जियां उड़ाने में विशवास करतें हैं ”
    “सब यही सोचते हैं देश उनके नियमों से चले”लेकिन —
    ” देश की जनता के लिए प्रभुद्ध और बुद्धीजीवियों द्वारा भविष्य की सोच के आधार पर बनाई गई राज-नीतियां व नियमों का पालन करना और कराना नागरिकों का कर्तव्य है तथा देश के विकास के लिए समय-समय पर राज -नियमों में संसोधन करना ही राज-नीती है, देश सेवा है –लेकिन इसका हल ज्यादा पार्टियां होने से कभी नहीं हो सकता

    • http://www.myviews.co.in DR. NEERAJ MEEL

      वाह भाई वाह ,बहुत अच्छा लिखते हो …क्या http://www.myviews.co.in पर नियमित लेखन करना चाहोगे ? अगर हां तो तुरंत http://www.myviews.co.in पर क्लिक करो और सबमिट करो अपनी लेखन सामग्री

  • rahul chaveria

    aajkal ki ka fashion
    boy and girl both can try to make the special love
    but boy want money
    girl want handsome boyfriend
    and parents want children,s
    love is not requerment love is feelings love is life love is family love is friends
    but the youth can change the defination of love
    if some money in the pocket of boy he will purchase the choco and band for friends but he
    forget the bestest friend is ur mother
    god give you nature
    mother give u life
    and friends give u happy movements
    but what u can return to ur god , ur mother , ur friends

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      बहुत अच्छा लिखते हो …क्या http://www.myviews.co.in पर नियमित लेखन करना चाहोगे ? अगर हां तो तुरंत http://www.myviews.co.in पर क्लिक करो और सबमिट करो अपनी लेखन सामग्री

  • Lokendra Sharma

    बचपन में हम एक खेल देखने जाया करते थे। सैंकड़ों लोगों से घिरे सड़क के
    किनारे दिखाए जाने वाले इस खेल में, एक छोटी उम्र का बच्‍चा होता था जो
    जम्‍बूरा बनता था, एवं एक उससे दुगनी उम्र का व्‍यक्ति होता था जो उसका
    उस्‍ताद बनता था। कहने को तो इस खेल को जम्‍बूरे का खेल कहा जाता था, मगर
    असल में यह खेल होता पूरा उसके उस्‍ताद का था। जम्‍बूरा तो बस अपने उस्‍ताद
    के इशारों पर नाचने वाली कटपुतली की तरह ही था। जम्‍बूरे को इस खेल में
    अपना दिमाग लगाने की इजाजत नहीं थी। उसे बस वही करना होता जो उसका उस्‍ताद
    कहता।
    अगर उसका उस्‍ताद कहता- “जम्‍बूरे नाच के दिखाएगा”। तो वह
    कहता-“उस्‍ताद दिखाएगा” और वो नाचने लग जाता। उसका उस्‍ताद कहता “जम्‍बूरे
    सब को गा के दिखाएगा” तो वह कहता “उस्‍ताद दिखाएगा” और वह गाने लग जाता।
    यानी जो उसका उस्‍ताद कहता वो बिना सोचे समझे बस कर देता।
    आज वही खेल
    सालों बाद वर्तमान परिदृश्‍य में देखने को मिल रहा है। बस फर्क इतना है,
    उस्‍ताद का किरदार कुछ असमाजिक तत्‍व निभा रहे है तो वही जम्‍बूरे का
    किरदार भारत देश की भावी युवा पीढी निभा रही है।
    आज का उस्‍ताद कहता
    है, “जम्‍बूरे राष्‍ट्र विरोधी नारे लगाएगा” । जम्‍बूरा कहता है “उस्‍ताद
    लगाएगा”, और वो लगाने लग जाता है। उस्‍ताद कहते हैं “जम्‍बूरे देश को
    जलाएगा” और उनके जम्‍बूरे कहते हैं “उस्‍ताद जलाएगा” औंर वह जलाने निकल
    पड़ते हैं। बिना इस बात को सोचे कि अगर घर ही जल गया तो फिर रहेंगे कहॉं।

    भारत की गरिमा भारत का गौरव सिर्फ भारतीय युवा पीढी है। अगर कुछ गलत हो
    रहा देश में तो आपको अपनी बात रखने का पूर्ण अधिकार है। मगर किसी राष्‍ट्र
    विरोधी ताकतों के हाथों की कटपुतली बनना वीरों के पुत्रों को शोभा नहीं
    देता। “जय हिन्‍द“
    “जय जय हिन्‍दी“
    यूवा लेखक
    लोकेन्‍द्र शर्मा
    8349222910

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      तुम्हारी कलम में ताकत है ,बहुत अच्छा लिखते हो …क्या http://www.myviews.co.in पर नियमित लेखन करना चाहोगे ? अगर हां तो तुरंत http://www.myviews.co.in पर क्लिक करो और सबमिट करो अपनी लेखन सामग्री

  • manjari

    आज मैंने अपने नए दूध वाले से पूछा की उसके घर में कौन कौन है. दरअसल नवरात्री पे कन्याएं ढूंढ पाना मुश्किल हो चला है. तो हमारे चढ़ावे वाले कपडे किसी कन्या को दे नहीं पाए थे. रख लिए की जब कोई कन्या मिलेगी उसे दे दूंगी. तो दूध वाले भैया थोड़ा सहमे से बोले “जी मेरी दो बेटियां हैं बीटा नहीं है. देख लीजिएगा बड़ी बेटी को कभी जब मैं दूध बांटने नहीं आ पता वो ही आती है”.
    अब ये दूध वाला मुझे अच्छा आदमी लगने लगा. दरअसल सालो पहले मेरे मां-पापा भी यही बताया करते थे की उनकी दो बेतिया हैं. हाँ , उनकी ख़ुशी और अपनी बेटियों पे उनका गर्व काफी बेहतर हुआ करता था. करीब पच्चीस साल पहले हमारे समाज में बेटा न होना मनो बेकार बेसहारा बेवकूफ होना हो. जी हाँ वो लोग जो बेटियों को ही अच्छी परवरिश देकर काबिल बनने की सोच रखते थे बस यही हुआ करते थे. खैर कुछ लोग और भी थे जो सिर्फ बेटियों के माँ बाप थे और बेटियां बेटो से काम नहीं के अलाप से सुर मिलते थे, पर जल्दी ही किसी डॉक्टर या पीर फ़कीर से चुपके चुपके बेटा पाने की चाहत पूरा करने में मदद लेते पाए जाते थे. फिर अगर चार पांच बेटियों के बाद उन्हें बेटा मिल जाये तो बस फिर बेटा कितना ज़रूरी है बुढ़ापे से लेकर परलोक तक सबको बता देते थे.
    ख़ुशी हुई जानकर के अब लोग बदल रहे है. कही न कही ये मेरे माँ पापा की अच्छी सोच का भी योगदान है के आज सिर्फ बेटियों के माँ बाप होना कोई सामाजिक झेंप की बात नहीं.

    • http://www.myviews.co.in DR. NEERAJ MEEL

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  • sadhawala

    मस्जिद तोड़ के मंदिर बनाया
    वहा पहले भी खुद था अब भी खुदा है
    तूने टोपी उतार के जेनयू डाला
    तू पहले भी जुदा था अब भी जुदा है

    @ साधावाला ( +91 9517359786 )

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  • मृदुल चंद्र श्रीवास्तव

    माझी को मेरा सलाम

    इस दुस्तंत्र के भयाह्वः, चट्टान के सामान,कठोर अहंकार को खंड-विखंड कर देने वाला था माझी,
    इस विभद्दस,कुरूप तंत्र को आइना दिखाने वाला था वो माझी,
    इस अचेत, निर्मम तंत्र को परिश्रम के पसीने से शर्म से डुबो देने वाला था दशरथ माझी,
    पद,महान,गौरव-गाथा झूठी,शान को तार-तार कर देने वाला था वो माझी,
    हौसला,शाहस,फौलाद का सीना,इन शब्दों पर भी भारी पड़ने वाला था दशरथ माझी,
    आदर्शवाद,और झूठे दर्शन-शास्त्र की ऊँची उड़ान को पाँवो तले कुचल कर रख देने वाला था मांझी,
    नतमस्तक,सास्टांग-दंडवत का ढोंग न करो ,प्रह्लाद से ध्रुव बन तुम्हे इस योग्य भी कहा छोड़ने वाला था वो माझी,
    एक साधारण सा दिखने वाला बस “आम आदमी” था वो “दशरथ मांझी”
    मृदुल चंद्र श्रीवास्तव
    -The Truth-

  • aditya goswami

    sabse pehle to trump yaani ki donald trump ko congratulation ki vo u.s.a. jaisi badi desh ke rashtrapati bane..
    bhut log kar rhe hain sadko par virodh trump ka,
    na dekha tha kabhi bhi esa haseen drishya , america ki sadko par
    jisne poori america economy par bhut effect pada h…

    hillary ya trump,
    kaun jeetega, ye mukabala,
    kaash itna hi josh,itna hi umang, duniya mein rehene vaale har insaan mein bhaarat ke pradhanmantri ko lekar hota, ki rahul gandhi ya modi,
    to aaj bharat ko chin se darna na padta…

    dusro ke baare mein sab jaante ho, magar ja kudh ke baare mein pooche to zero,
    mtlb, ki saat samudra door,
    america mein kaun president bn rha h uski umang zor shoro se bharat main bhi sunai deti h,
    kintoo swadesh mein kya chhal rha h , vo to fizool ki baate h.

  • Durgesh Kumar

    अता ही अता है,
    पता ही नहीं पता है|
    और जिसे पता था सारा मामला,
    आज वही लापता है|

  • Anjali kumari

    Aaj bithe fir khud ko trashti Rahi…Aasma pe urne k liye…Ek waajeb Pankh ko talashti rahi…Ek Saam hogi Jab khawishe mukaam legi…fir apne Pankho se aasma naap lungi main… 🙂

  • Neha Gautam

    Bade bade shehron me badi badi si zindagiyo me mushruf ho gye h log..
    Warna raunake to aaj bhi bazaaro me waisi he h….
    -NG

  • Tarun Trivedi

    Dekh chuka hu me jindagi ki raho ka raaz
    Gamo me rehakar bhi khusi me jine ka andaaz,,
    Bhool ja bita hua kal
    6od de ane vala pal
    Jeene k liye bas chalate rehana hai aaj
    Pyaar esa dena sabako ki
    humari kabar bhi ban jaye ek anokha taj

  • Rahman Khan

    कभी किसी का दिल मत तोड़ो, क्यों की हम इंसानों के पास ये दिल ही है जो खुदा से जोड़ता है। और जब हमारी वजह से किसी का दिल टूटता है न तो उस टूटे दिल का दर्द हमसे ज्यादा खुदा को महसूस होता है। और फिर खुदा की नियती के हिसाब से एक दिन हमे भी उसी दर्द का एहसास होता है जो हमारी वजह से कभी किसी को हुआ था।